Wednesday, July 28, 2010

Mere Hamsafar

अरमानों का शहर गर टूटे इस कदर
छूट जायें सब उम्मीदें, मुस्किल हो जाए डगर
तुम रहना पास यूँ ही अपना जुनून लेकर
फिर मुकम्मल सारा जहाँ होगा, मेरे हमसफ़र

आँखों का साहिल जब मचलता ही जाए
बह जाए, छूट जाए, और काबू में न आए
तुम रहना पास यूँ ही अपना हौंसला लेकर
फिर खुशियों का समा होगा, मेरे हमसफ़र

आँधियाँ जब दिल का दस्तक खटखटायें
गिला-शिकवा, बेचैनियाँ, घर कर जाएँ
तुम रहना पास यूँ ही अपना सुकून लेकर
फिर मीठी नींद सा नशा होगा, मेरे हमसफ़र

अनकहे जज़्बातों को समझते रहना तुम मगर
आँखों के प्यार को पढ़ते रहना हर नज़र
तुम रहना पास यूँ ही अपनी मुहब्बत लेकर
फिर जन्नत भी फिदा होगा, मेरे हमसफ़र


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