Thursday, November 26, 2015

Companion

बूढ़े हो रहे हैं हम शायद
अब मन यूँ होता है
कि रोज़ घर जाएं
तो तुम मिला करो 

Thursday, November 5, 2015

Shauk

वो बढ़ती धड़कनें, लुका-छिपी रोज़ की 
आँखें मिलाकर ना मिलाना तुम्हारा 
तुम्हें करना अनदेखा, वो कसक, वो मनमारी 
तुमसे बात ना करना हया नहीं, शौक है हमारा 

प्यार भरी मुस्कान, वो चाहत तुम्हारी 
हाथ बढ़ाकर हिचकना तुम्हारा 
तुम्हें देखकर अपने दिल की ख़ुशी 
छुपाना दर्द नहीं, शौक है हमारा 

नैनों के कोनों से निहारना, तुम्हारा करना इंतज़ार 
गलियारों में गलती से टकराना, तुमसे लेना तकरार 
पास आकर तुम्हारे दूर दूर रहना, तुम्हें चाहना बार बार 
रब से माँगना तुम्हें खैरात नहीं, काबा है हमारा 

Monday, November 2, 2015

Udaan

नीला आसमां जब समंदर सा लहराए
रेशम के गुच्छे जब चूमने को आएं 
फड़फड़ाती हवा सुनाये सूरज चंदा की बातें 
और चोटी से परबत क छाती सुहाए 
ऊंचे पेड़ों के ऊपर जब घास का आँचल मिल जाये 
तब होता है आग़ाज़ … 
कि इस विराट जहां में हम हैं कितने छोटे से साये 
और उस हर एक लम्हे में,
ज़िन्दगी बार बार मुकम्मल हो जाये 
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...