Sunday, August 15, 2010

The Valleys In Between

Happy Independence Day XD

On this occasion of great joy, however, the tumults going on in the valley of Kashmir are disheartening. They have inspired this poem in me. Kashmir has been as much our mistake as much as it has been Pakistan's, and the Kashmiris themselves. We Indians have dealt the Kashmiris as much atrocities as we accuse the terrorists of.

However, it is time to have a two-way effort, to start new, to reach out a hand, to touch hearts once again, to not let the valleys in between deepen even more...

This poem shows the words I would like to say to my brother of the vaadi...the things he holds me responsible for, the things I am guilty of, and the things that went wrong...but also it has the hope of a new beginning...kuch kadam hamare, kuch tumhare...



यहाँ पर हूँ मैं, यहीं पर तुम हो
अपनी ही नफ़रत में ऐसे तुम गुम हो
हसीन ये वादी, गमगीन तुम्हारी रूह
न तो एक मुस्कान, न ही गुफ्तगू
तुम कहते हो तुम जुदा हो हमसे
कुछ कटे-कटे से, कतराते हो हमसे

हिचकते तुम हो, हिचकते हैं हम भी
कुछ कदम तुम चलो, कुछ चलें हम भी

सवालों का तीर तुम्हारी हर निगाह
पूछती हों जैसे "क्यूँ दी थी दगा"
दीवाली क्या ईद क्या रमज़ान का माह
गरजते थे गोले पटाखों की जगह
तुम कहते हो तुम खफा हो हमसे
कुछ-कुछ मायूस, नाराज़ हो हमसे

रुसवाँ तुम हो, रुसवाँ हैं हम भी
कुछ कदम तुम चलो, कुछ चलें हम भी

न कभी बड़ी हुई, न देखी कभी सुबह
तुम्हारी वो बेटी जो थी फूल की तरह
रौंदा उसे, बेइज़्ज़त किया हैवानों की तरह
कभी वहाँ के काफ़िर, कभी अपने बने वजह
तुम कहते हो हम कातिल हैं उसके
मैय्यत उठा दी हमने निकाह में उसके

नाराज़गी है वहाँ, शर्मिंदगी है यहाँ भी
कुछ कदम तुम चलो, कुछ चलें हम भी

काट दी पूरी ज़िंदगी क़ैद-सी में रहकर
तुम वहाँ के न हो सके वहीं के होकर
बंदूकों की ताल, बारूद-गोली का संगीत
यही सब सुना, बस, पत्थरों का गीत
तुम कहतो हो हम ज़ालिम हैं बस
गीराई तुम्हारी लाशें जब तुम थे बेबस

अंगारें हैं वहाँ, चिंगारी है यहाँ भी
कुछ कदम तुम चलो, कुछ चलें हम भी

हाँ हम दोषी हैं, पर सिर्फ़ हम ही तो नहीं
तुम्हारे खून का धब्बा बस हम पर ही नहीं
तुम कहते हो तुम हमारे अपने नहीं
वादी सिर्फ़ तुम्हारी है, हम हक़दार नहीं
क्या दूसरी शुरुआत की गुंजाइश नहीं?
जब इतनी दी जगह, तो दिल में क्यूँ नहीं?

चाहत है वहाँ, चाहत है यहाँ भी
कुछ कदम तुम चलो, कुछ चलें हम भी


Happy Independence Day, once again! :)

Untill later, Cuidate!


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2 comments:

  1. I dont noe wat to say apart from 'wow' and ' beautiful'...because dat is the first thing that always comes to my mind!! :)
    Dil Ko Chuu Gayi!! :')

    ReplyDelete

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