Monday, November 2, 2015

Udaan

नीला आसमां जब समंदर सा लहराए
रेशम के गुच्छे जब चूमने को आएं 
फड़फड़ाती हवा सुनाये सूरज चंदा की बातें 
और चोटी से परबत क छाती सुहाए 
ऊंचे पेड़ों के ऊपर जब घास का आँचल मिल जाये 
तब होता है आग़ाज़ … 
कि इस विराट जहां में हम हैं कितने छोटे से साये 
और उस हर एक लम्हे में,
ज़िन्दगी बार बार मुकम्मल हो जाये 

6 comments:

  1. That's beautiful poetry! (and that too in Hindi!)

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  2. Replies
    1. Another CSE in the offing :P What about you?

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    2. CSE? Me...living in the limbo

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    3. The exam lady, the civil services exam! . Ha! get out of the limbo, the blogging world sure has missed you!

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