Udaan

नीला आसमां जब समंदर सा लहराए
रेशम के गुच्छे जब चूमने को आएं 
फड़फड़ाती हवा सुनाये सूरज चंदा की बातें 
और चोटी से परबत क छाती सुहाए 
ऊंचे पेड़ों के ऊपर जब घास का आँचल मिल जाये 
तब होता है आग़ाज़ … 
कि इस विराट जहां में हम हैं कितने छोटे से साये 
और उस हर एक लम्हे में,
ज़िन्दगी बार बार मुकम्मल हो जाये 

Comments

  1. That's beautiful poetry! (and that too in Hindi!)

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  2. Replies
    1. Another CSE in the offing :P What about you?

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    2. CSE? Me...living in the limbo

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    3. The exam lady, the civil services exam! . Ha! get out of the limbo, the blogging world sure has missed you!

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