Thursday, November 5, 2015

Shauk

वो बढ़ती धड़कनें, लुका-छिपी रोज़ की 
आँखें मिलाकर ना मिलाना तुम्हारा 
तुम्हें करना अनदेखा, वो कसक, वो मनमारी 
तुमसे बात ना करना हया नहीं, शौक है हमारा 

प्यार भरी मुस्कान, वो चाहत तुम्हारी 
हाथ बढ़ाकर हिचकना तुम्हारा 
तुम्हें देखकर अपने दिल की ख़ुशी 
छुपाना दर्द नहीं, शौक है हमारा 

नैनों के कोनों से निहारना, तुम्हारा करना इंतज़ार 
गलियारों में गलती से टकराना, तुमसे लेना तकरार 
पास आकर तुम्हारे दूर दूर रहना, तुम्हें चाहना बार बार 
रब से माँगना तुम्हें खैरात नहीं, काबा है हमारा 

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