Wednesday, May 8, 2013

Adoration

देखते थे चुपके चुपके तुझको 
देखता है प्यार प्यार को जैसे 
जो छू गुज़रती तो लगता ऐसा 
सनम को मिली वफ़ा हो जैसे 

दुआ को दी दुआएं तेरी 
मेरी ही तुम रिदा हो जैसे 
जाती हुई हवाओं में हों 
ताबीज़ों की रवायें जैसे 

रेगिस्तान की रेतों में हैं 
सूफी के गीत समाए जैसे 
मिल जाऊं तुझ में भी मैं 
मुहब्बत में हो इबादत जैसे 

5 comments:

  1. मुहब्बत में हो इबादत जैसे!
    बेहद सुन्दर अल्फाजों मे बेहतरीन पंक्तियाँ। सुभान-अल्लाह!

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