Showing posts with label republic day. Show all posts
Showing posts with label republic day. Show all posts

Jan 26, 2013

Amanat

जिनकी गोद में हंसती-खेला करती थी 
आज उन्हें गुमसुम चुपचाप रोते देखती हूँ 
जो लड़ गए मेरे लिए लाठी-बर्फ पानी से भी 
उन्हें आज हताश हारा हुआ बेबस देखती हूँ 
जिन जानवरों को जीते-जी जलाना चाहती थी 
तुमको उन्हें फांसी देते भी डरते देखती हूँ 
ठंडा हुआ जब सबका गुस्सा, मुझे कर अनदेखा 
तुम्हे आज आज़ादी का जश्न मनाते देखती हूँ।