जिनकी गोद में हंसती-खेला करती थी
आज उन्हें गुमसुम चुपचाप रोते देखती हूँ
जो लड़ गए मेरे लिए लाठी-बर्फ पानी से भी
उन्हें आज हताश हारा हुआ बेबस देखती हूँ
जिन जानवरों को जीते-जी जलाना चाहती थी
तुमको उन्हें फांसी देते भी डरते देखती हूँ
ठंडा हुआ जब सबका गुस्सा, मुझे कर अनदेखा
तुम्हे आज आज़ादी का जश्न मनाते देखती हूँ।